शिक्षा का हो चुका व्यवसायीकरण डिग्री तो प्राप्त हो जाती किंतु नहीं मिलता अनुभव -संत शिरोमणि विद्यासागरजी महाराज

आचार्य संत शिरोमणि विद्यासागरजी महाराज की साकोली नगरी में भव्य अगवानी व मंगल प्रवेश
बुलंद गोंदिया। मनोहरभाई पटेल कला, वाणिज्य महाविद्यालय, साकोली में आचार्य संत शिरोमणि विद्यासागरजी महाराज की भव्य अगवानी व मंगल प्रवेश हुआ। गोंदिया शिक्षण संस्था के सचिव व पूर्व विधायक राजेंद्र जैन, संचालक निखिल जैन, प्राचार्य हरीश त्रिवेदी, एन सी. सी व एन एस. एस, स्पोर्टिंग के विद्यार्थीओं ने महाराजजी का भव्य स्वागत किया।
आचार्य संत शिरोमणि विद्यासागरजी महाराज ने आज अपने प्रवचन में भव्य जीवों को संबोधित करते हुए कहा कि आज की शिक्षा पद्धति व्यवसाय बन चुका है, आज शिक्षा के साथ साथ अनुभव नहीं है। सारी पढ़ाई लिखाई करने के बाद भी नौकरी नहीं मिलती क्योंकि डिग्री तो मिल जाती है लेकिन अनुभव नहीं मिलता। यह सब हमारे देश में पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव है। विदेशी कभी भारत का भला नहीं कर सकता। आज इतिहास को स्कूलों में लीपा-पोती करके पढ़ाया जाता है, हमारा पुराना इतिहास उठा कर देखो। यदि भारत को समृद्ध बनाना है तो आगे नहीं बल्कि पीछे लौटना होगा अपनी संस्कृति अपनी मर्यादा के तरफ। आज अंडे को शाकाहार और दूध को मांसाहार बताया जा रहा है। आज संस्कार हीन संतान के कारण माता पिता का कुछ काम नहीं होने वाला। अपने बच्चों को नेता साहूकारी, व्यापारी बनाओ ताकि वें लोगों को रोजगार दे सके। साथ ही अनेक विषयों पर आचार्य श्री ने स्वर्णिम भारत की कल्पना की है।
डोंगरगढ़ तीर्थक्षेत्र के विनोद बड़जात्या व चंद्रकांत जैन ने डोंगरगढ़ के संदर्भ में जानकारी दी। महाराजजी के मार्ग व्यवस्था में शीतल जैन नागपूर, राजू एन जैन गोंदिया, प्रो. कार्तिक पनिकर, शीलेन्द्र तिवारी भंडारा, यशपाल कराड़े साकोली, विनोद भूते लाखनी, सहयोग कर रहे है। महाराजजी को आहार का सौभाग्य राजेंद्र जैन के परिवार को प्राप्त हुआ। सामाजिक कार्यकर्ता सौ. सरिता सुनिल फुंडे , प्रभाकर सपाटे ने साकोली में गुरूजी के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद लिया। इस प्रसंग पर सुरेश पाटनी, सिद्धार्ध पाटनी कोलकाता, नेहा बड़जात्या, प्रथम बड़जात्या मुंबई, देवेंद्र पांड्या, आशिक पांड्या गोंदिया ने गुरुदेवजी का आशीर्वाद लिया।

 

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