3 करोड़ 77 लाख का शासकीय धान खरीदी घोटाला मुख्य आरोपी रेखलाल टेंभरे 20 जून तक पुलिस हिरासत में,गोरेगांव नेहरू सहकारी धान गिरणी के केंद्रों का घोटाला 24 आरोपियों पर मामला दर्ज

बुलंद गोंदिया। गोंदिया जिले की गोरेगांव की नेहरू सहकारी धान गिरणी मर्यादित गोरेगांव रजिस्टर्ड नंबर 111 के माध्यम से वर्ष 2018 -2019 व 2019 -2020 में शासकीय आधारभूत धान खरीदी केंद्र के माध्यम से की गई खरीदी में 3 करोड़ 77 लाख 98 हजार 600 रुपए का घोटाला जांच में सामने आया। इस मामले में गोरेगांव पुलिस थाने में 24 आरोपियो जिसमे संस्था के तत्कालीन संचालक मंडल केंद्र अध्यक्ष व्यवस्थापक ग्रेटर के खिलाफ मामला दर्ज किया हैं। उपरोक्त मामले में मुख्य आरोपी रेखलाल छंदलाल टेंभरे को गोरेगांव पुलिस द्वारा 13 जून की रात को हिरासत में लिया गया जिसके पश्चात 14 जून को न्यायालय में पेश किया गया जहां मुख्य आरोपी को 20 जून तक पुलिस हिरासत में न्यायालय द्वारा भेजा गया।
गौरतलब है कि गोंदिया जिला धान उत्पादक जिला होने के साथ ही बड़े पैमाने पर किसानों से शासकीय आधारभूत धान खरीदी केंद्रों में धान लिया जाता है। जिसके लिए संस्थाओं को नियुक्त किया जाता है इसी के अंतर्गत गोरेगांव की नेहरू सहकारी धान गिरणी मर्यादित गोरेगांव रजिस्टर्ड नंबर 111 के माध्यम से वर्ष 2018 -2019 व 2019 -2020 में शासकीय आधारभूत धान खरीदी केंद्र शुरू करने का आदेश प्राप्त हुआ था। जिसके माध्यम से दवड़ीपार व कवलेवाड़ा में धान खरीदी की गई थी। उपरोक्त मामले में बड़े पैमाने पर घोटाला होने की शिकायत दर्ज हुई थी जिसमें मुख्य रुप से किसानों के नाम पर बोगस धान खरीदी कर राशि का भुगतान अन्य खातों में किया गया था।
उपरोक्त मामले की संपूर्ण जांच होने के पश्चात इस मामले विशेष लेखा परीक्षक वर्ग एक सहकार व वस्त्र उद्योग सहकारी संस्था वर्धाकी संगीता लोखंडे द्वारा गोरेगांव पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया गया था।
गोरेगांव पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 284/2022 भादवि की धारा 406, 408, 409, 467, 468, 471, 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जिसके बाद मुख्य आरोपी रेखलाल छंदलाल टेंभरे को 13 जून को गोरेगांव पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर 14 जून को गोंदिया न्यायालय में पेश किया गया जहां आरोपी को 20 जून तक पुलिस हिरासत में भेजा गया। तथा मामले की जांच गोरेगांव पुलिस थाने के पुलिस निरीक्षक सचिन म्हात्रे कर रहे हैं। व उपरोक्त प्रकरण में न्यायालय में सरकार की ओर से एडवोकेट मुकेश बोरिकर द्वारा अपना पक्ष रखा गया।

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