किसान विरोधी कृषि कानूनों को तत्काल रद्द कर देश के किसानों को दे न्याय जिला राष्ट्रवादी कांग्रेस पक्ष ने भारत बंद समर्थन में की मांग

बुलंद गोंदिया। केंद्र सरकार द्वारा पारित किसान विरोधी कृषि कानूनों के विरोध में सोमवार 27 सितंबर को आयोजित भारत बंद के समर्थन में जिला राष्ट्रवादी कांग्रेस पक्ष द्वारा डॉ बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष पूर्व विधायक राजेंद्र जैन के नेतृत्व में भारत बंद के समर्थन में धरना दिया गया। इसके पश्चात उपविभागीय अधिकारी को राष्ट्रवादी के शिष्टमंडल द्वारा निवेदन दिया गया जिसमें मांग की गई कि किसानों को विश्वास में ना लेते हुए देश के किसी भी किसान संगठन अथवा किसान नेता व प्रमुख विपक्षी पक्षों को विश्वास में ना लेकर गत वर्ष सितंबर 2020 में संसद में तीन किसान विरोधी कृषि कानून को मंजूरी दी गई थी। उपरोक्त तीनों कानूनों पर लोकसभा में किसी भी प्रकार की चर्चा न कर प्रस्ताव मंजूर किया गया जब देश के किसानों द्वारा उपरोक्त कानून का निरीक्षण किया गया तो किसानों द्वारा उत्पादित उपज को समर्थन मूल्य का समावेश नहीं होने का सामने आया जिसमें किसानों के साथ धोखाधड़ी की गई है। जब से देश के विभिन्न किसान संगठन 1 वर्ष केंद्र सरकार के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं किंतु आज तक केंद्र सरकार द्वारा इस पर किसी भी प्रकार का हल नहीं निकाला गया। एक और रासायनिक खादों की बढ़ती कीमतें ,कीटनाशक के भाव, डीजल ,पेट्रोल की मूल्यवृद्धि जीवनावश्यक वस्तु तथा किसानों को कृषि में लगने वाले यंत्र व अन्य सामग्रियों के भाव आसमान छू रहे हैं। जिससे किसान को कृषि कार्य करना असंभव हो रहा है ।भाजपा द्वारा वर्ष 2014 के लोकसभा के चुनाव में कृषि उत्पादन खर्च के आधार पर डेढ़ गुना भाव देने की घोषणा की थी यह घोषणा पूर्ण नहीं की इसके विपरीत ने कृषि कानून के अंतर्गत वर्तमान समय में समर्थन मूल्य की शर्त को भी निकाल दिया है। जिसके चलते देश में विभिन्न प्रकार की फसल का उत्पादन करने वाले किसान आगामी समय में नुकसान में जाएंगे जिसके चलते केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए तीनों कृषि कानूनों का गोंदिया जिला राष्ट्रवादी कांग्रेस पक्ष द्वारा विरोध कर उपरोक्त कानूनों को तत्काल रद्द करने की मांग की इस प्रकार का निवेदन भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री भारत सरकार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पक्ष की ओर से दिया गया इस अवसर पर पूर्व विधायक राजेंद्र जैन, विनोद हरिणखेडे, गंगाधर परशुरामकर, अशोक सहारे, देवेंद्रनाथ चौबे, विशाल शेंडे, सतीश देशमुख, विनीत सहारे, सुनील भालेराव, राजू एन जैन, रफिक खान, हेमंत पंधरे, मनोहर वालदे, केतन तुरकर, चुन्नीभाऊ बेदरे, जगदीश बहेकार, खालिद पठाण, वीरेंद्र जैस्वाल, अजय हलमारे, लता रहांगडाले, रजनी गौतम, उषा मेश्राम, सोनम मेश्राम, शैलेश वासनिक, सुनील पटले, नागरतन बन्सोड, गंगाराम बावनकर, सय्यद इकबाल, सुनील तिवारी, बंटी मिश्रा, सि. के. बिसेन, सतीश पारधी, सौरभ रोकडे, एकनाथ वहिले, अक्की अग्रहरी, हरगोविंद चौरासिया, नागो बन्सोड, राजू रय्यानी, पवन धावडे, रमेश बावणथळे, महेश करियार, रमण उके, दिलप्रीत होरा, कान्हा बघेले, नितिन टेम्भरे, कृष्णा भांडारकर, पुरण उके, लव माटे, कपिल बावणथळे, पिंटू कटरे, हर्षवर्धन मेश्राम, रमेश ठवरे, योगेश डोये, बोधानंद गुरुजी, विक्की बाकरे, दर्पण वानखेडे, बिट्टू बिसेन, प्रतीक पारधी, असावील कुरेशी, निरंजन हतकय्या, मंगेश रंगारी, अरविंद गणवीर, प्रतीक बन्सोड, महेंद्र लिल्हारे, आकाश मेश्राम, दिलीप डोंगरे, कुणाल बावणथळे, रवी तुपटे, बंसीधर अग्रवाल, बालू कोसरकर, रौनक ठाकूर, नरेंद्र बेलगे सहित अन्य कार्यकर्ता व किसान उपस्थित थे।

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